अकादमिक हितधारक संवाद - स्वावलम्बन की रीढ़ : डॉ.नरेंद्र सिंह राठौड़

 

ये विचारअकादमिक हितधारक संवाद कार्यक्रम के उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि ,डॉ.नरेंद्र सिंह  राठौड़, माननीय कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ,उदयपुर ने  सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय दवरा आयोजित तथा अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली,राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना द्वारा प्रायोजित " अकादमिक उद्योग सहभागिता” “विषयक राष्ट्रीय कार्यक्रम  के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किये। 

आपने  विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच सहयोग को अगले स्तर तक ले जाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है और कहा की बदलते समय के साथ पाठ्यक्रमों में किया जाने वाला प्रयास न केवल समुदाय को प्रगति की और ले जाता है अपितु छात्र छात्रों को समयानुकूल स्वयं में वैचारिक और व्यावहारिक क्षमताएं विकसित करने में मदद करता है जिससे वे भविष्य में नौकरी तलाशने वाले ना होकर  नौकरी प्रदाता बने। 

आपने बताया की इस से साझेदारी मॉडल के माध्यम से पाठ्यक्रम डिजाइन और वितरण का नेतृत्व करने में सक्षम बनाया सकेगा। इसके लिए जरूरी है की  शिक्षुता, व्यावहारिक प्रशिक्षण, वास्तविक जीवन सिमुलेशन और विशेष नियोक्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल किये जाएँ। जब सहयोग की बात आती है तो अधिकांश शिक्षाविद और उद्योग के फ्रंटलाइनर एक ही पृष्ठ पर होते हैं। 

संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार में वृद्धि, नवीन वाणिज्यिक उत्पादों की डिलीवरी, शिक्षण में सुधार, सीखने और छात्रों के ज्ञान और उनकी रोजगार क्षमता के संवर्धन के साथ-साथ वित्त पोषण की नई धाराएं प्रदान करने के माध्यम से कई लाभ हैं
 

डॉ. मीनू श्रीवास्तव अधिष्ठाता ,सामुदायिक एवम व्यवहारिक विज्ञान महाविद्यालय ने स्वागत करते हुए कहा की प्रस्तावित पाठ्यक्रम स्नातक विशेषताओं और उद्यमिता कौशल को बढ़ाने के लिए अकादमिक-उद्योग संपर्क में सुधार करेगा और बदलते परिदृश्य के अनुसार मौजूदा पाठ्यक्रम में परिवर्तन के विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान करेगा। स्वागत पश्चात महाविद्यालय के उद्देश्य ,संस्थागत सुविधाओं ,पाठ्यक्रमों ,सफल छात्र छात्राओं पर सारगर्भित प्रज़न्टेशन दिया  

आपने बताया की कार्यक्रम में देश भर से लगभग ३० विषय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं जिनमें सरकारी ,गैर सरकारी विभागों के अधिकारी डॉ कैलाश बृजवासी- जतन, ,उद्यमीयो (मेधावी गौतम -जयपुर ,सोनाली राव -बेंगलुरु ,सीमा मंत्री -उदयपुर ,सरला मूंदड़ा -उदयपुर ,निधि दुबे –जयपुर, ईशा शर्मा -जयपुर), श्री कौशल मूंदड़ा ,प्रदेश सचिव , राजस्थान  जर्नलिस्ट एसोसिएशन , ऑफिसर श्री विष्णु कुमार चौहान ,रिलायंस कीमोटेक  इंडस्ट्री , श्री सी. एस. शर्मा ,विभागाध्यक्ष ,क्वालिटी अशोरेन्स ,भीलवाड़ा समेत राष्ट्रीय संस्थाओं के उच्चाधिकारी यथा  

जॉर्ज -इंदौर , राष्ट्रीय सार्वजनिक सहयोग और बाल विकास संस्थान, डॉ रीतू चंद्रा-नई दिल्ली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ,नई दिल्ली ,शिक्षा मंत्रालय , ,डॉ नवीता अब्रोल -इग्नू , डॉ गार्गी गोपेश -जयपुर , श्री पंकज द्विवेदी- क्षेत्रीय उपनिदेशक , महिला एवम बाल विकास, मोहम्मद आमिर पर्रे-टेक्नीकल ऑफिसर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण भी शामिल थे जिन्होंने विभागाध्यक्षों डॉ। 

सुधा बाबेल ,डॉ। धृति सोलंकी ,डॉ रेनू मोगरा ,डॉ। हेमू राठोड और डॉ गायत्री तिवारी द्वारा दिए गए विभागीय प्रस्तुतीकरण के पश्चात विषय समबन्धी रोजगारों की संभावनाओं पर मंथन करके अनुशंसाएं दी।
 

संचालिका तथा आयोजन सचिव डॉ. गायत्री तिवारी ,इंचार्ज -प्लेसमेंट सेल एंड इनफार्मेशन ब्यूरो ने बताया की   कार्यक्रम  का उद्देश्य • हितधारकों और समुदाय के बीच नए शुरू किए गए और चल रहे डिग्री कार्यक्रमों की दृश्यता बढ़ाना,• छात्रों के बीच रोजगार और उद्यमिता बढ़ाना ,सीखने के माहौल में अकादमिक सुधार करना, स्नातक विशेषताओं और उद्यमशीलता कौशल को बढ़ाने के लिए अकादमिक-उद्योग संपर्क में सुधार करना,• बदलते परिदृश्य के अनुसार मौजूदा पाठ्यक्रम में संशोधन के विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान करना,हितधारकों के बीच नए शुरू किए गए और चल रहे डिग्री कार्यक्रमों की दृश्यता बढ़ाना और छात्रों के बीच रोजगार और उद्यमिता बढ़ाने के लिए अकादमिक-उद्योग संबंधों को मजबूत करना है। 

वक्ताओं द्वारा दी गई मुख्य अनुशंसाओं में नवाचार ,समुदाय की बदलती आवश्यकतानुसार अनुसंधान ,शोध  के परिणामों की  आमजन तक पहुँच सुनिश्चित करना ,तकनीकी संवर्धन ,नवीनतम जानकारी हासिल करना ,उपलब्ध साधनों का अधिकतम उपयोग इत्यादि प्रमुख रहे।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों के अधिष्ठाता ,निदेशक और उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

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