सीएचओ भर्ती : ब्रिजकोर्स एग्जाम फरवरी में प्रस्तावित, छात्रों को स्टडी मैटेरियल ही अब मिला इतनी जल्दी वे सब्जेक्टिव पेपर की तैयारी कैसे करें

 

 

-ब्रिजकोर्स की पढ़ाई इग्नू के सिलेबस से लेकिन परीक्षा होगी आरयूएचएस के सब्जेक्टिव पैटर्न से

-पहले ही पोस्टिंग में देरी,अब कोविड की तीसरी लहर भी बड़ी चुनौती

जयपुर। नेशनल हेल्‍थ मिशन के तहत होने वाली कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ) भर्ती एक बार फिर विवाद में आ गई है। अब मामला चयनित सीएचओ के ब्रिजकोर्स से जुड़ा है। सीएचओ के लिए चयनित उम्मीदवारों को पोस्टिंग से पहले 6 माह का ब्रिजकोर्स करना अनिवार्य है। राजस्थान में इग्नू के सिलेबस के अनुसार ब्रिजकोर्स करवाया जा रहा है, लेकिन परीक्षा आरयूएचएस करवाना चाह रहा है। इग्नू ब्रिजकोर्स होने के बाद इसको परीक्षा ऑब्जेक्टिंव पैटर्न के अनुसार करवाता है। 

वहीं आस्यूएचएस यह परीक्षा सब्जेक्टिव पैटर्न पर करवाना चाहता है। सीएचओ के लिए चयनित कई अभ्यर्थी जीएनएम और आयुर्वेद शिक्षा के हैं, जिनकी पढ़ाई हिंदी में हुई है और, एंट्रेंस भी हिंदी में दिया हे लेकिन ब्रिजकोर्स की पढ़ाई उन्हें इंग्लिश में करनी पड़ रही है। ब्रिजकोर्स शुरू हुए करीब तीन माह हो गए हैं और चयनित उम्मीदवारों के पास किताबें ही तीन से चार दिन पहले आई है। ऐसे में सब्जेक्टिव पेपर' देने में उनको और भी अधिक दिक्कत आएगी, क्‍योंकि इसकी तैयारियों के लिए भी कम समय मिलेगा। पहले ही सीएचओ ,की पोस्टिंग में काफी देरी हो चुकी है।

एमसीक्यू पैटर्न से रहेजी पारदर्शिता : एक्सपर्ट के अनुसार ऑब्जेक्टिव पैटर्न  (एमसीक्यू ) पर परीक्षा करवाने से परिणाम जल्दी जाएगा। सब्जेव्टिंब की कॉपियों को जांचने और इसके बाद परिणाम तैयार में काफी वक्‍त लग जाएगा। वहीं ऑब्जेब्टिब पैटर्न से परिणाम भी जल्दी जाएगा और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

भरत बेनीवाल, अध्यक्ष, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन : ब्रिजकोर्स की परीक्षा फरवरी में प्रस्तावित हैI स्टूडेंट को स्टडी मैटेरियल ही अब मिला है। इतनी जल्दी छात्र सब्जेक्टिव पेपर की तेयारियां नहीं कर सकते हैं। पेटर्न बदलने के संबंध में आरयूएचएस के अधिकारियों से बात हुई है। इंग्लिश में ऑब्जेक्टिव पेपर होने पर करीब करीब सहमति बन चुकी है। एनएचएम के निर्देशों का इंतजार है।

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