बहुरंगी मछली पालन स्वरोजगार का सुगम माध्यम - डॉ. शर्मा


 

उदयपुर, 24 दिसम्बर, 2021 महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के संगठक मात्स्यकी महाविद्यालय में शुक्रवार 24 दिसम्बर, 2021 को बहुरंगी मछली पालन पर राष्ट्रीय मात्स्यकी विकास बोर्ड, मत्स्य विभाग, हैदराबाद मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित 8 प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला के चतुर्थ  3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। 
 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एल एल शर्मा पूर्व अधिष्ठाता मात्स्यकी महाविद्यालय ने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों के लिए बहुरंगी मछली पालन की नई-नई विद्याओं को अपना कर स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। डॉ. शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों से रंगीन मछली पालन कौशल के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए आह्वान किया कि घरों में, प्राइवेट स्कूलों, अस्पतालों मे अक्वेरियम लगाने का प्रचलन बढ़ा है। इसके अलावा  उदयपुर शहर बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जहां बहुरंगी मछलियों का व्यवसाय एक बड़ा अच्छा कमाई का साधन बन सकता है।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. बी. के. शर्मा ने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड की योजनाएं एवं प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रशिक्षणार्थियों को विस्तृत जानकारी प्रदान की। डॉ. शर्मा ने मत्स्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की एन.एफ.डी.बी. द्वारा स्वीकृति में मत्स्य विभाग, राजस्थान सरकार की अहम भूमिका पर आभार व्यक्त किया। प्रशिक्षण के उद्घाटन अवसर पर डॉ. शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को बहुरंगी मछली पालन व्यवसाय को अपनाने की सलाह दी साथ ही इस व्यवसाय से होने वाली आमदनी एवं अपने जीवन स्तर को सुधार कर समाज के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करने का संदेश दिया जिससे प्रशिक्षणार्थी अपना जीवनस्तर सुधार सकते हैं। 
 
डॉ. बी.के. शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान प्राप्त जानकारी को जन-जन तक पहुचाने बहुरंगी मछली पालन को अपनाने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में उदयपुर, चितौड़गढ़, पाली नागोर राजसमन्द जिलो व आस-पास के प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। डॉ. बी.के. शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को संदेश दिया कि इस व्यवसाय को अपना कर आप रोजगार देने वाले बने नाकि लेने वाले बने।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने जलजीवशाला का निर्माण, उसे स्थापित करना, जलीय पौधों की जानकारी विभिन्न प्रकार की मछलियों की प्रजातियां एवं उनके प्रजनन संबंधी जानकारी के अलावा जलजीवशाला की आवश्यक वस्तुओं भोजन एवं जलजीवशाला स्थापना का जलजीवशाला निर्माण की संपूर्ण जानकारी प्रतिभागियों को प्रायोगिक रूप में प्रदान की। 
 
प्रशिक्षण के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में अधिष्ठाता डॉ. बी.के. शर्मा पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एल. एल. शर्मा पूर्व अधिष्ठाता डॉ. सुबोध कुमार शर्मा एवं डॉ. एम. एल. ओझा ने ने अपने अनुभवों व चलचित्रों के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित किया। 
 
प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रशिक्षणार्थियों ने विश्व प्रसिद्ध फतहसागर झील पर स्थित एक्वागैलेरी का भ्रमण कर बहुरंगी मछलियों की 150 से अधिक प्रजातियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बी. के. शर्मा ने मछलियों के बारे में प्रायोगिक जानकारी प्रदान की। 

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं मात्स्यकी महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. सुबोध कुमार शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को बहुरंगी मछली पालन के क्षेत्र में बढ़ते हुए योगदान की जानकारी, प्रशिक्षणार्थियों को प्रदान की। 

समापन समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एल. एल. शर्मा पूर्व अधिष्ठाता डॉ. सुबोध कुमार शर्मा एवं कार्यक्रम समन्वयक और अधिष्ठाता डॉ. बी. के. शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर प्रतिभागियों में से सुश्री नीलू कुमारी, दीपिका जोशी, तोषिता शर्मा, शिवानी चौहान और विवेक कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी एवं अपने अनुभव भी व्यक्त किए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के सह प्राध्यापक डॉ. एम.एल. ओझा ने दिया।
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